रमज़ान मुबारक2020
रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है, ये पूरा एक महीना होता है जो कि इस्लामिक कैलेंडर में 9th month होता है और बड़ा ही पवित्र समय होता है इस समय पूरी दुनिया के मुस्लिम रोज़ा रखते है और अपने परवरदिगार की इबादत करते है। रमज़ान के रोज़े 5 मुख्य स्तंभो में से एक है जिस पर इस्लाम धर्म की नींव है
जिसमे पहला तौहीद, दूसरा नमाज़, तीसरा रोज़ा, चौथा ज़कात, और पाँचवा हज।
चूंकि इस्लामी कैलेंडर lunar calendar पर आधारित है, तो रमज़ान का चांद दिखते ही मुस्लिम समुदाय रमज़ान की खास तैयारिया शुरू कर देते है । रमज़ान का चांद दिखते ही रात की special नमाज़ तरावीह शुरू हो जाती है और सहरी जिसको pre dawn meal कहते है का एहतेमाम किया जाता है
रमज़ान का पूरा दिन परहेज़गारी और इबादत में गुजरता है, इस दौरान वो न कुछ खाते हैं और न ही कुछ पीते है
शाम को मग़रिब के वक़्त इफ्तारी जिसको रोज़ खोलना भी कहते है किया जाता है, अमूमन मुस्लिम लोग रोज़ा खुजूर से खोलते है ये एक सुन्नत अमल है।
दुनिया भर के मुस्लिम अपने घरों में और दीगर जगहों पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करते है ईसमें वो अपने जानने वालों दोस्तो व अहबाब को आमंत्रित करते है
असल मे रमज़ान एक अनुशासन का नाम है जिसमे बंदा अपने परवरदिगार के और पास आ जाता है और उसको राजी करने की कोशिश करता है
रमज़ान के रोज़े हर बालिग़ मोमिन पर फ़र्ज़ है। हा अगर कोई मजबूरी या बीमारी है तो उसमें बहुत रियायत भी की गई है।
रमज़ान में लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं.और मुस्लिम समुदाय के लोग साल भर रमजान का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यताएं हैं कि इस महीने अल्लाह अपने बंदों को बेशुमार रहमतों से नवाजता है और दोजख (जहन्नम) के दरवाजे बंद कर के जन्नत के दरवाजे खोल देता है. इस बार रमजान का पाक महीना चांद दिखने पर 24 या 25 अप्रैल से शुरू होगा. आप सभी को रमज़ान की बहुत बहुत मुबारक बाद।माना जाता है कि रमजान के महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज दुआ को कुबूल करता है और उनकी तौबा को कुबूल कर के उनको गुनाहों को माफ करता है।
असल मे रोजे रखने का मतलब सिर्फ खाने और पीने से मनाही नही होती बल्कि कई और ऐसी चीजें है जिनसे हर मुस्लिम को बाज रहना होता है । रोज़ा असल मे पूरे जिस्म का होता है, जैसे आंख का रोजा ये है कि कोई गलत चीज न देखी जाए, इसी तरह कान का रोजा ये है कि किसी भी तरह की कोई गलत बात न सुनी जाये और जबान का रोज़ा कोई भी गलत बात न कि जाए, इसी तरह के और पाबंदिया है जो रोज़ा रखने वाले पूरी करते है।
मेरा अपना मानना है कि रोजा एक तरह का practice है जो आने वाले 11 महीनों को लिए है ताकि हर बंदा अपने कैरेक्टर अपने अखलाकियात को बेहतर और सामाजिक बना ले, और उसी का पालन वो पूरी जिंदगी करे, ये नही की सिर्फ रमज़ान भर सारी excercise ऊपरी मन से की और ईद आते ही शैतान फिर से आज़ाद हो गया ( ऐसी मान्यता है कि रमज़ान का चांद दिखते ही अल्लाह सारे शैतानो को कैद कर देता है , ताकि वो सब मिलकर जमीन पर रहने वालों बंदों को बहका न पाए।) इसलिए कहा जाता है कि रोजा रखने पर इंसान हर गलत काम और बुराइयों से पाक हो जाता है. जिस तरह इंसान रमज़ान में अपने
अखलाकियात को दुरुस्त रखता है उसी तरह उसको पूरे वर्ष ही अपने अखलाकियात को रखना चहिये और बुराइयो से दूर रहना चाहिए ताकि हम अपना आखरी और कनफर्म सफर बड़े ही आराम से पूरा कर सके और यह से जाने के बाद लोग आपको आपके अच्छे कर्मों से याद रखे,।
इसी के साथ आज की बात मैं खत्म करता हूं, एक बार फिर से आप सभी को आने वाला रमज़ान का बा बरकत महीना बहुत बहुत मुबारक हो।
ईद मुबारक
गुड बाय एंड take care
















Bahut Bhadiya Bhai
ReplyDeleteThanx bhai, hausla afzayi k liye
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